"दृढ संकल्प"
मैं इतनी आसानी से
टूट जाऊंगा
ये तुमने सोचा भी कैसे
मैं हवा की झोंको से टूट जाऊ
वो पत्ता नहीं हूँ
मैं तो पेड़ हूँ
मेरे अन्दर अनगिनत पत्ते हैं
और हैं न जाने कितने बीज भी
जो पैदा कर सकते हैं मुझ जैसे कई पेड़ को
अरे जाओ जाके
किसी और को डराना
मैं जानता हूँ अच्छी तरह से
कागज़ को जहाज़ बनाके उड़ाना
मैं इतनी आसानी से
टूट जाऊंगा
ये तुमने सोचा भी कैसे...?
1 comment:
very nice bro......... nice creativity..:)
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