Saturday, May 3, 2008

तुम्हीं से जुड़ा हूँ

मैं तुमसे अलग और तुम्हीं से जुड़ा हूँ
मैं तुम्हारी तबस्सुम का आशिक बड़ा हूँ

तुम मानो न मानो सच सच ही रहेगा
मैं तेरी चाहत में डूबा नशे की तरह हूँ

उतरोगे जिस दिन तुम दिल की गहराई में
जानोगे उस दिन मैं कैसा पागल प्रेमी रहा हूँ

सब सपने बिखर गए पर तुझे सजा के रखा
मैं तेरी अदाओं का पागल दीवाना रहा हूँ

                                मैं तुमसे अलग और तुम्हीं से जुड़ा हूँ ... 

2 comments:

आलोक said...

तबस्सुम यानी? चिट्ठों की कलात्मक दुनिया में आपका स्वागत है।

Shashish Kumar Tiwari said...

muskurahat hota hai tabssum ka matlab. thanks.