तेरे आने का मत पूछ कितना इंतजार है
तेरे दीदार को ये आँखे कब से बेकरार हैं
तुझे भूल जाने का भी बता क्या फायदा
जब दर्द आज भी इस दिल मे बरक़रार है
तेरे आने का मत पूछ कितना इंतजार है
न रास्ते न मंजिल न कोई हमसफ़र है
बिन तेरे सच पूछ तो जीना ये जीना बेकार है
बदल गए वो वक्त , वो लम्हें , कहाँ वो प्यार है
सुन सके मेरे दिल की आवाज़
न जाने वो दिल कहा किस पार है
तेरे आने का मत पूछ कितना इंतज़ार है
मुझे पता है ये इंतज़ार कभी ख़त्म न होगी
फ़िर भी इस दिल में पलती उम्मीद हज़ार है
कैसे समझाऊ मैं तुम्हारी आंखो को
मेरी खामोशी ही मेरे दिल का इजहार है
तेरे आने का मत पूछ कितना इंतज़ार है ...
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