जब सपने कोई पुरे न हुए
उम्मीदों के बाँध मिले टूटे हुए
मुझे सिखाया था जिन अपनों ने
गैरों से बचना
मैं हैराँ हूँ वो अपने आज अपने न रहें
सब रिश्ते खड़े हैं स्वार्थ के सहारे यहाँ
दिल के रिश्ते किसी के पूरे न हुए
इक-दूजे को ठगने की इस अंधी दौड़ में
प्रेम पीछे छुटा इंसा इंसा न रहें...
...............जब सपने कोई पूरे न हुए!!!
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