Saturday, May 3, 2008

मैं हैराँ हूँ

जब सपने कोई पुरे न हुए 
उम्मीदों के बाँध मिले टूटे हुए 
मुझे सिखाया था जिन अपनों ने 
गैरों से बचना 
मैं हैराँ हूँ वो अपने आज अपने न रहें 
सब रिश्ते खड़े हैं स्वार्थ के सहारे यहाँ 
दिल के रिश्ते किसी के पूरे न हुए
इक-दूजे को ठगने की इस अंधी दौड़ में 
प्रेम पीछे छुटा इंसा इंसा न रहें...  
...............जब सपने कोई पूरे न हुए!!!

No comments: