"इश्क की राहों से गुजरना था हमें भी
जलते हुए घर में ठहरना था हमें भी
हमको कहां क़ुबूल थे सुकून भरे दिन
बेचैनियों के सागर में उतारना था हमें भी
कुछ भी नहीं था पर तुम्हें देखने के बाद
बदलना था हमें भी संवरना था हमें भी
हमको कहां मालूम था हम भी डूबेंगे
कि इश्क में टूट के बिखरना था हमें भी!!!"
-शशिष@8.00pm
जलते हुए घर में ठहरना था हमें भी
हमको कहां क़ुबूल थे सुकून भरे दिन
बेचैनियों के सागर में उतारना था हमें भी
कुछ भी नहीं था पर तुम्हें देखने के बाद
बदलना था हमें भी संवरना था हमें भी
हमको कहां मालूम था हम भी डूबेंगे
कि इश्क में टूट के बिखरना था हमें भी!!!"
-शशिष@8.00pm
No comments:
Post a Comment