Monday, April 27, 2015

"मैं नहीं चाहता
किसी को भी चाहना
उतनी शिद्दत से अब

किसी को भी
उस पागलपन से
मोहब्बत करना
जिसमें मैं भूल जाऊं सबकुछ
सिवाय एक उसके

बहुत मुश्किल होती है
तुम नहीं समझोगे
जब टूटता है प्यार
दिन मुश्किल होते हैं
रातें मुश्किल होती हैं
तुम नहीं समझोगे

बहुत मुश्किल हो जाता है
लबों पे एक छोटी सी भी
हंसी रखना
आँखों में बचा कर कोई भी
ख़ुशी रखना
और ऊपर से अपनों का ये प्रश्न
'क्या हुआ है उदास क्यों हो?'
जो थोड़ी बहुत जिंदगी
बची भी रहती है
सब मर जाती है एक झटके में

नहीं बिलकुल नहीं
नहीं करना मुझे अब मोहब्बत किसी से
बड़ी मुश्किल से लौटा हूँ मैं खुद में
अब फिर नहीं खोना है मुझे खुद को
ऐ खुदा कुछ देर
मुझे बस मुझमें रहने दे
करने दे मुझे मोहब्बत बस खुद से
पाने दे मुझे अपने आप को
करने दे बातें मुझे अपने आप से

बैठने दे अपने साथ मुझे
सुनने दे अपना ही दिल मुझे
बस कुछ देर के लिए
बचा मुझे
हो सके तो इस दुनिया से
दूर कहीं छुपा मुझे
जहाँ बस मैं रहूँ
और रहे मेरे साथ
बस परछाइयाँ मेरी

हां कुछ देर के लिए
मुझे तू भी नहीं चाहिए
क्योंकि तू भी बहुत तेज है
मैं जनता हूँ तेरी चालाकियां
जा मुझे खुद में रहने दे
हां कुछ देर के लिए !!!"

-शशिष@10.58am

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