Sunday, April 26, 2015

"तुम आ जाओ
तो साथ में खुशियों की चादर बनाएंगे

और फिर उसे हम
अपने हौसलों पर बिछायेंगे

फिर चैन से सोयेंगे हम
ख्वाबों की एक गहरी नींद

और असली चाँद को
बहला के फुसला के जमी पे लाएंगे

तुम आ जाओ
तो साथ में खुशियों की चादर बनाएंगे!"

-शशिष@3.36am


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