"तुम सुला के गए
पर मुझे नींद नहीं आई
मैं जागा रहा रात भर
न जाने क्यों चैन नहीं आई
बस तुम याद आते रहे
बार बार
बस तुम ही तुम दिखते रहे
आर पार
अंधेरों में न जाने क्यों
रौशनी बिखरी रही
और नींद में वो पुरानी वाली
बात भी नहीं आई
तुम सुला के गए
पर मुझे नींद नहीं आई!"
-शशिष@3.16am
पर मुझे नींद नहीं आई
मैं जागा रहा रात भर
न जाने क्यों चैन नहीं आई
बस तुम याद आते रहे
बार बार
बस तुम ही तुम दिखते रहे
आर पार
अंधेरों में न जाने क्यों
रौशनी बिखरी रही
और नींद में वो पुरानी वाली
बात भी नहीं आई
तुम सुला के गए
पर मुझे नींद नहीं आई!"
-शशिष@3.16am
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