Sunday, April 26, 2015

"तुम सुला के गए
पर मुझे नींद नहीं आई

मैं जागा रहा रात भर
न जाने क्यों चैन नहीं आई

बस तुम याद आते रहे
बार बार
बस तुम ही तुम दिखते रहे
आर पार
अंधेरों में न जाने क्यों
रौशनी बिखरी रही
और नींद में वो पुरानी वाली
बात भी नहीं आई

तुम सुला के गए
पर मुझे नींद नहीं आई!"

-शशिष@3.16am











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