Tuesday, April 28, 2015

"कई रिश्तों को
अपनी मुठ्ठी में रक्खा है
इस नेटवर्क ने
जो एक पल को भी ये
छुट्टी पे जाता है
खामोशियाँ ऊपर से
और अंदर में बेचैनियां
पसर जाती हैं चारों तरफ!"

-शशिष@12.17pm


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