"कई रिश्तों को
अपनी मुठ्ठी में रक्खा है
इस नेटवर्क ने
जो एक पल को भी ये
छुट्टी पे जाता है
खामोशियाँ ऊपर से
और अंदर में बेचैनियां
पसर जाती हैं चारों तरफ!"
-शशिष@12.17pm
अपनी मुठ्ठी में रक्खा है
इस नेटवर्क ने
जो एक पल को भी ये
छुट्टी पे जाता है
खामोशियाँ ऊपर से
और अंदर में बेचैनियां
पसर जाती हैं चारों तरफ!"
-शशिष@12.17pm
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