Tuesday, April 28, 2015

"ढ़ेर सारी बातें 
करनी थी तुमसे
भागा भागा आया था
जल्दी से मैं
कई किस्से सुनाने थे
तुम्हें आज के
पर अफ़सोस
हर बार भाग के आने से
जरुरी तो नहीं
किसी का मिल जाना
जैसे कि आज
तुम भी नहीं मिले
पर कोई बात नहीं
तन्हाइयों को सुना देता हूँ
तुम्हारे बदले
मैं अपने तमाम किस्से
और ये सुनेंगी भी
मेरी हर फ़ालतू बातें
क्योंकि इन्हें
ये कहने नहीं आता
कि 'रात काफी हो गयी है
चलो फिर कल बात करते हैं'!!!"

-शशिष@11.43pm

No comments: