Tuesday, April 2, 2013

तुम

तुम हो
तो तुम तक ही है
मेरा जीना
तुम तक ही है
साँसों की पहुँच
और 
तुम तक ही है
मेरा होना

पर  जब 

तुम न हो
तो फिर भी  है
सब कुछ
यहाँ तक की तुम भी 
बस मुझे छोड़ के ...

कभी मैं सोचूं
तो
हूँ बिलकुल बेवकूफ सा
लेकिन
ख़त्म नहीं कर सकता
ये अपनी बेवकूफी
क्योंकि
इसके होने में तुम हो

और
पता है ?
मैंने नहीं किया
ख़त्म खुद को भी
आज तक 
क्योंकि
मेरे होने में भी
तुम हो
और तुम ही रहोगे
सदियों तक ...!!!

-शशिष  कुमार तिवारी






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