"ग़ज़ल"
जिनकी आहट का हमने हर पल इंतज़ार किया
दिल तोड़ा उन्हीं ने जिससे दिल ने प्यार किया
कसमे वादे सब कहने की चीज रही
हमने खोया वही जो पाने का इंतज़ार किया
बड़ी मुश्किल से हमने दिल लगाया था कहीं
दिल के सँभलने का फिर वर्षों इंतज़ार किया
उनका छोड़ के जाना हमें कितनी छोटी सी बात थी उनके लिए
जिन्हें पाने के लिए हमने सारे ज़माने को दरकिनार किया
खुद उठा लिया ग़मों का टोकरा अपने सर पे
उनकी तबस्सुम का हमने अंतिम नज़रों तक इंतज़ार किया
खैर वो सलामत रहें जहा भी रहें येही फरियाद है रब से
जिस से हमने कभी हद से ज्यादा था प्यार किया...!!!
जिनकी आहट का हमने हर पल इंतज़ार किया
दिल तोड़ा उन्हीं ने जिससे दिल ने प्यार किया
कसमे वादे सब कहने की चीज रही
हमने खोया वही जो पाने का इंतज़ार किया
बड़ी मुश्किल से हमने दिल लगाया था कहीं
दिल के सँभलने का फिर वर्षों इंतज़ार किया
उनका छोड़ के जाना हमें कितनी छोटी सी बात थी उनके लिए
जिन्हें पाने के लिए हमने सारे ज़माने को दरकिनार किया
खुद उठा लिया ग़मों का टोकरा अपने सर पे
उनकी तबस्सुम का हमने अंतिम नज़रों तक इंतज़ार किया
खैर वो सलामत रहें जहा भी रहें येही फरियाद है रब से
जिस से हमने कभी हद से ज्यादा था प्यार किया...!!!
No comments:
Post a Comment