Thursday, August 2, 2012

"कैसा लगता है???"

किसी अनजान चेहरे के लिए
दिल का मचलना कैसा लगता है,
बता ख्वाबों के आसमान पर चलना
कैसा लगता है.

शब् के अँधेरे में जब आँखें देखती हैं किसी को,
बता नींदों में किसी आहट का इंतज़ार कैसा लगता है.


सुबह में आँखें खुलते ही जब
मन बेचैन हो खोजता है किसी को,
बता अनजान गलियों में दिन भर भटकना कैसा लगता है.

जब शाम तक झलक मिलता नहीं उस अनजान चेहरे का,
बता घर लौटना मायूस हो कैसा लगता है.

जब रात में लगती नहीं भूख खाने की,
बता माँ का डाटना तुझे कैसा लगता है.

पूरी रात उसका चेहरा बनाना और देखना उसको,
बता खुदा से उसके इक झलक का फ़रियाद करना कैसा लगता है.

किसी अनजान चेहरे के लिए
दिल का मचलना कैसा लगता है,
बता ख़्वाबों के आसमान पर चलना कैसा लगता है??? 

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