Thursday, August 2, 2012

किसी और के वादों से तुम अपने सपनों को सीचते हो
बड़े नादान हो रेत से बने महलों के ख्वाब देखते हो

खुद पे करो भरोसा किसी और पे नहीं
गर जीतना है तुमको तो फिर क्यों पीछे को देखते हो

वो कायर ही हैं जो दूसरों को अक्सर दोष देते हैं
तुम क्यों नहीं  एक बार अन्दर से खुद को देखते हो

तुम में ही हैं सारी शक्तियां तुम मानो तो सही
बड़े नादान हो जो तुम उन्हें बाहर में खोजते हो

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