कि इस कदर पागलपन हो
अपने काम के लिए
हर वक्त तैयार रह
तू नए इन्ताहन के लिए
हँसने दे उन्हें
जो आज तुझपे हँसते हैं
कल आयेंगे वो तेरे पास कुछ दान या ज्ञान के लिए
कि इस कदर पागलपन हो
अपने काम के लिए
खुद ही पे रख विश्वास इतना
कि खुदा खुद मजबूर हो जाये
तुझपे एहसान के लिए
लगा ले आग खुद में इस कदर
कि जर्रा जर्रा तुझ से मिले
अपनी पहचान के लिए
कि इस कदर पागलपन हो
अपने काम के लिए
रख तू पैर अपने जमी पे
मुठ्ठियों में आसमान के लिए
जरा सा जी ले आज इस दर्द को
जिन्दगी भर के मुस्कान के लिए
कि इस कदर पागलपन हो
अपने काम के लिए.....
---- by Shashish Kumar Tiwari
अपने काम के लिए
हर वक्त तैयार रह
तू नए इन्ताहन के लिए
हँसने दे उन्हें
जो आज तुझपे हँसते हैं
कल आयेंगे वो तेरे पास कुछ दान या ज्ञान के लिए
कि इस कदर पागलपन हो
अपने काम के लिए
खुद ही पे रख विश्वास इतना
कि खुदा खुद मजबूर हो जाये
तुझपे एहसान के लिए
लगा ले आग खुद में इस कदर
कि जर्रा जर्रा तुझ से मिले
अपनी पहचान के लिए
कि इस कदर पागलपन हो
अपने काम के लिए
रख तू पैर अपने जमी पे
मुठ्ठियों में आसमान के लिए
जरा सा जी ले आज इस दर्द को
जिन्दगी भर के मुस्कान के लिए
कि इस कदर पागलपन हो
अपने काम के लिए.....
---- by Shashish Kumar Tiwari
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