तुमसे जो रिश्ता जोड़ा है
खुद को तब से कुछ समझा है
थोडा थोडा तो जागा हूँ
दिल जबसे तुम में उलझा है
बदला बदला सा मंजर है
आँखों में एक समंदर है
छुआ जब से तेरे शब्दों ने
इक आग लगी मेरे अन्दर है
कुछ करने की चाहत है अब
नील गगन में मुझको उड़ना है
जब आशीष है तेरा मुझपे अब
ख्वाबो को सच में भूनना है
तुमसे जो रिश्ता जोड़ा है ....
----द्वारा शशिष कुमार तिवारी
खुद को तब से कुछ समझा है
थोडा थोडा तो जागा हूँ
दिल जबसे तुम में उलझा है
बदला बदला सा मंजर है
आँखों में एक समंदर है
छुआ जब से तेरे शब्दों ने
इक आग लगी मेरे अन्दर है
कुछ करने की चाहत है अब
नील गगन में मुझको उड़ना है
जब आशीष है तेरा मुझपे अब
ख्वाबो को सच में भूनना है
तुमसे जो रिश्ता जोड़ा है ....
----द्वारा शशिष कुमार तिवारी
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