Monday, December 26, 2011

A little Poem

तुम फिर आ गए आज
मेरी yaadon में
किसी ऐसी याद की तरह
jise bhula के भी bhulna मुश्किल sa है

तुम फिर आ गए आज
मेरी ख़ामोशी में 
किसी ऐसी आवाज़ की तरह
jise chah के भी रोकना मुश्किल है

तुम बार बार आज ही जाते हो
मेरे लाख मना करने पे भी

ठीक है तो फिर एक बात बताओ 
लौट के जाते ही क्यों हो...
बार बार... अकेला कर के!!!

२.

तुम्हे शायद याद होगा 
या फिर तुम भूल गए होगे
कि किस तरह मैंने खोजा था तुम्हे.
अपनी वर्षो पुरानी कहानियों के किताब से 
जैसे कोई खोजता हो किसी के दिए हुए 
मोर के पंख को 
या फिर किसी गुलाब के फूल को 
और शायद तुम ये भी भूल गए होगे 
कि किस तरह mai झूम उठा था 
तुम्हे पाके
न जाने तुम्हे कुछ भी याद है या नही 
और अगर नही 
तो फिर मेरे लिखने का क्या फायदा...!!!

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