Wednesday, April 4, 2012

कौन कहता है कि

कौन   कहता  है    कि   सपने   पुरे  नहीं   होते 
मोहब्बत  सपनों से   बेपनाह  कर  के  तो देखो 
और छुते हैं  आसमां को  जमी पे ही  रहने वाले 
अपने मुकद्दर से यारों एक  बार लड़ के तो देखो 

सच तो   ये  है   कि दुनिया   खुबसूरत बहुत है 
अपनी  नज़रों    में  मोहब्बत भर   के तो देखो 
और   खेलने का मजा  तो  बहुत  खूब  है यारों 
कभी  जीत और हार  से  ऊपर  बढ़ के तो देखो 

रुख  आँधियों का  मोड़ना भी  मुमकिन दिखेगा 
तुम फुर्सत  से कभी  खुद  के  अन्दर   तो देखो 
और    क्या   है    जो  तेरे   बस   में   नहीं   है 
एहसास   खुदा   का खुद  में कर   के तो   देखो 

कौन   कहता   है कि   सपने   पुरे    नहीं   होते 
मोहब्बत   सपनों   से   बेपनाह  कर के तो देखो 

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