कौन कहता है कि सपने पुरे नहीं होते
मोहब्बत सपनों से बेपनाह कर के तो देखो
और छुते हैं आसमां को जमी पे ही रहने वाले
अपने मुकद्दर से यारों एक बार लड़ के तो देखो
सच तो ये है कि दुनिया खुबसूरत बहुत है
अपनी नज़रों में मोहब्बत भर के तो देखो
और खेलने का मजा तो बहुत खूब है यारों
कभी जीत और हार से ऊपर बढ़ के तो देखो
रुख आँधियों का मोड़ना भी मुमकिन दिखेगा
तुम फुर्सत से कभी खुद के अन्दर तो देखो
और क्या है जो तेरे बस में नहीं है
एहसास खुदा का खुद में कर के तो देखो
कौन कहता है कि सपने पुरे नहीं होते
मोहब्बत सपनों से बेपनाह कर के तो देखो
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