Wednesday, June 11, 2008

कैसे लिख लेता हूँ मैं

क्या बताऊ कैसे लिख लेता हूँ मैं
न जाने क्या है इस दिल की गहराई में
जिसे कह के भी न कह पाता हूँ मैं
सोचता हूँ हर घड़ी न जाने किसके बारे में
आख़िर कौन है बंद आँखों से जिसको देख लेता हूँ मैं
क्या बताऊ कैसे लिख लेता हूँ मैं
छोटी सी उम्मीद दिल मे छोटी सी आशा है
पांऊँ कैसे अपने सपनो को 
चलो तुम्ही से पूछ लेता हूँ मैं
न मत कहना खामोश न रहना
समझना जरा सा सहारे किसके जीता हूँ मैं
क्या बताऊ कैसे लिख लेता हूँ मैं
ये आदत मेरी हमसफ़र सी है
इसी में डूब हर पल जीता हूँ मैं
कौन है? जो समझे मेरी ख़ुशी यहाँ
ग़मों को चूम के ही मुस्कुरा लेता हूँ मैं
अब क्या बताऊ कैसे लिख लेता हूँ मैं ...

4 comments:

Unknown said...

ab toh tumhe bataana hi hoga ki tum kaise likh lete ho?????????
There's no escaping this I tell u
U r a big threat to lesser writers like me................

HEMANT SHRIVASTAVA "PRANAV" said...

defenitely u r also a good writer all these gazals are out of comment really it is fantastic.

HEMANT SHRIVASTAVA "PRANAV" said...

dear sir, ur gazals are toches one's heart and they feel it is written by heart.

rupesh said...

u r realy fantastic