Wednesday, April 29, 2015

चुपके चुपके रो लूंगा---

"तुमसे कुछ ना बोलूंगा
चुपके चुपके रो लूंगा
कोई शिकायत न करूँगा तुमसे
दर्द अकेले ही सब ढ़ो लूंगा
तुम चाहे जितना आजमाओं मुझे
छूट तुम्हें हम देते हैं
बिखरूं टूट के भी अब मैं तो 
उफ़ तक तुमसे ना बोलूंगा
चुपके चुपके रो लूंगा

तन्हा तन्हा रह लूंगा
खामोशियों से बातें कर लूंगा 
प्रिय!तुमसे न होऊंगा कभी
खुद से नाराज़ मैं हो लूंगा
चुपके चुपके रो लूंगा

ये चाहत नहीं है मेरी कि 
तुमको मुझसे कोई दुःख पहुंचे
आंसू तेरी आँखों के
मेरे नाम कभी बरसे
तुझको हँसता देखूं तो 
मैं भी तो जिन्दा हो लूंगा
तुमसे कुछ ना बोलूंगा 
प्रिय!चुपके चुपके रो लूंगा
चुपके चुपके रो लूंगा ……!!!"

-शशिष@11.06am

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