Sunday, November 18, 2012

इश्क में तेरे
सब कुछ लुटा बैठे हैं
प्रिय !!!
हम अपना नाम तक भुला बैठे हैं

अपनों से पूछते हैं
अपने घर का पता
तेरी याद में हम
सबकी यादें गवां बैठे हैं

सफ़र कैसा भी हो
कोई फर्क नहीं पड़ता
जब हम होशोहवास में
अपनी मंजिल भुला बैठे हैं

उन्हें मालूम है सबकुछ
फिर भी वो मेरे नहीं
खुदा तेरे लोग
इश्क की कीमत लगा बैठे हैं!!!

---शाशिष कुमार तिवारी
   (15 नवम्बर 2012 पटना)

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