Saturday, November 17, 2012

बड़े अरमान हैं दिल में दिल भले ही छोटा है
मैं ऊपर से हँसता हूँ कोई मेरे अन्दर में रोता है

ये हर दिन की कशमकस उफ़! ये जिन्दगी
कहीं रात ही नहीं कोई दिन में भी सोता है

बड़ी कुर्सियों पे बैठे छोटे लोग हैं जहां
इंसानियत का क़त्ल वहा वादों से होता है

कुत्ते भी वफादार हैं इंसानों की बस्ती में
भ्रष्टाचार का आरोप हमेशा इंसानों पे होता है

एक लम्बी छिट्ठी से प्रेम मैसेज में बदल गई
माँ अब जींस में होती है बच्चा जमीं पे रोता है

खुदा नाम को तेरे अब सब बेचते हैं यहाँ
बड़ी मुश्किल से अब कोई तुझ जैसा होता है

                                                         -शशिष कुमार तिवारी
                                                        (16 नवम्बर 2012 पटना )

No comments: