कुछ खोया खोया रहता हूँ
जब भी मैं तुमसे मिलता हूँ
नैनों में कुछ कुछ होता है
जब भी मैं तुझमे घुलता हूँ
रातों में तब मैं जगता हूँ
जब ख्वाबों में तुम आते हो
तुम हो न जाओ जुदा मुझसे
ये सोच के भी मैं डरता हूँ
कभी चलते चलते जब रुकता हूँ
तो पन्नों पे तुझको ही लिखता हूँ
जब अँधेरा सा दिल में छाता है
तब तुझको ही मैं पढता हूँ
बातों में जो न कह पाया मैं
ख़ामोशी में तो कहता हूँ
तू समझे या फिर न समझे
मैं दिल से तुझपे मरता हूँ
कुछ खोया खोया रहता हूँ ......
जब भी मैं तुमसे मिलता हूँ
नैनों में कुछ कुछ होता है
जब भी मैं तुझमे घुलता हूँ
रातों में तब मैं जगता हूँ
जब ख्वाबों में तुम आते हो
तुम हो न जाओ जुदा मुझसे
ये सोच के भी मैं डरता हूँ
कभी चलते चलते जब रुकता हूँ
तो पन्नों पे तुझको ही लिखता हूँ
जब अँधेरा सा दिल में छाता है
तब तुझको ही मैं पढता हूँ
बातों में जो न कह पाया मैं
ख़ामोशी में तो कहता हूँ
तू समझे या फिर न समझे
मैं दिल से तुझपे मरता हूँ
कुछ खोया खोया रहता हूँ ......
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