हाँ
मैं तुम्हें मना नहीं सकता
बता नहीं सकता
कि क्यूँ हूँ मैं खामोश
तुम्हें खामोश देख कर भी
तुम्हें लगता होगा कि
मुझे कोई परवाह नहीं
तुम्हारी नाराजगी से
लेकिन ऐसा नहीं
पर न जाने फिर भी क्यूँ
इस बार मैं ये नहीं मानता कि
मैं तुम्हें मना पाउँगा
क्यूंकि शायद मैं अब वो नहीं
जो था तुम्हारे साथ होने में...
अब कुछ अजीब सा है
जो शब्दों में न तो बयान होता है
और न घुलता भावनाओ में.....
1 comment:
ye kiske liye?
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