Friday, August 5, 2016

"इंतज़ार किया है मैंने
बहोत
हां बहोत
और मैंने सीखा है
ये इंतज़ार करना
उस चाँद से
जो दिनभर
तो ओझल होता है
सूरज की रौशनी में
पर चमकता है
शब में
नूर आसमां का बनके!"

-शशिष कुमार तिवारी 

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