Saturday, April 25, 2015

"जितनी मिली है जिंदगी 
ठीक से तू जीना सीख 
लबों पे तबस्सुम ला 
आसुंओं को पीना सीख 

गुजरे कल का रोना छोड़ 
वो तेरे हाथ के बाहर है 
आज अभी से दर्द सभी 
खुशियों से तू सीना सीख 

बेकार के कसमें वादों से 
खुद को बाहर लाके देख 
आनेवाले कल को छोड़ 
आज अभी में जीना सीख!"

-शशिष 


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