Thursday, April 23, 2015

"अँधेरी रातों में मेरी रौशनी बनकर
तुम रहो मेरी सांसों में जिंदगी बनकर

मैं तुमपे सबकुछ लूटा दूंगा अपना
तुम आओ तो खुदा की बंदगी बनकर!"

-शशिष कुमार तिवारी
(23rd April 2015, 1.30am, New Delhi)

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