Wednesday, April 29, 2015

"तू उदास रहे
तो मैं कैसे हंस लूं
जो तू भूखी रहे
तो मैं कैसे खा लूं
मैं कैसे चलूं
जब तू ही साथ ना दे
बता न प्रिय
मैं कैसे जीऊँ
जब तू ही सांस ना दे

कुछ भी कर
दे कोई सजा मुझको
पर नाराज़ ना हो तू मुझसे
कुछ भी कर
दे चाहे बद्दुआ मुझको
पर दूर ना हो तू मुझसे

इक तू ही तो है
जिसके सामने रोने से नहीं डरता हूँ मैं
इक तू ही तो है
कि जब तू पास हो
तो कुछ भी खोने से नहीं डरता हूँ मैं
मेरी उम्मीद ही मुझसे रूठ जाये
तो बता न कैसे उड़ लूं मैं
प्रिय जब तू ही उदास हो
तो बता न कैसे हंस लूं मैं

लौट आ कि बिन तेरे
कोई गुजारा नहीं है
यूँ तो तमाम दुनिया है मेरे साथ
पर तुझ जैसा कोई सहारा नहीं है
पर तुझ जैसा कोई सहारा नहीं है!!!"

-शशिष@11.14pm

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